होली-गिरिधर कुमार

होली आई है सच में फिर अबकी बार, फिर सजायेंगे हम रंगों की बारात, खुद के कूचे से बनायेंगे, रंगों में डूबे हंसते चेहरे, कुछ मेरी तरह, कुछ तुम्हारी तरह,…

एक श्रद्धांजलि-गिरिधर कुमार

जिनसे सीखे सपने बुनने जिनसे गुनगुनाना सीखा, अलविदा लता आपसे हमने जिंदगी को आजमाना सीखा। सीखा हमने मुहब्बत की लौ कैसे दिल में मचलती है, कैसे कोई अमन की खुशबू…

एक कविता,स्वयं के लिए

एक कविता,स्वयं के लिए कुछ सच बताऊं,इससे पहले एक शपथ लेता हूँ आपसे, आप इसे भूलेंगे नहीं, मेरे साथ मेरे गम में डूबेंगे नहीं। मैंने खुली छूट दे रखी है…

राष्ट्रभाषा का सम्मान-बीनू मिश्रा भागलपुर

राष्ट्रभाषा का सम्मान” संस्कृत की लाडली बेटी है यह हिंदी, जन जन की भाषा है यह हिंदी सुंदर, मनोरम, मीठी और सरल है यह हिंदी, तेजस्विनी है और अनूठी है…

आत्मलय-गिरिधर कुमार

देखता हूँ गौर से क्षितिज के पास लेकिन सम्मुख सा सभी कुछ के साथ स्वयं की प्रतीति ऊहापोह और विश्रांतता दोनों ही! यह तो अपना ही चेहरा है! यह तो…