बुद्ध की पावन धरा। दिव्यता से है भरा।। है रमा जन्मस्थली। बोल मगही मैथिली।। अंगिका सह भोजपुरी। शिल्क है भागलपुरी।। ज्ञान से हर-पल हरा। बुद्ध की पावन धरा।।०१।। भूमि उर्वर…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
मर्यादा पुरुषोत्तम-राम किशोर पाठक
बुलाते हैं प्यारे, सकल जन राजा भजन में। अधोगामी सारे, सहज तर जाते शरण में।। पिता आज्ञा से जो, गहन वन में पाँव धरने। निभाने मर्यादा, इस भुवन का भार…
राम वन से आ गये- राम किशोर पाठक
राम वन से आ गये। देवता बन भा गये।। सूचना से राष्ट्र में। हर्ष पूरे छा गये।। शोक चौदह साल का। आज खुद से ढा गये।। आरती की थाल ले।…
दहि तू एक्जाम रे ना -मनु कुमारी
नुनू खुशी – खुशी से दहि तू एक्जाम रे, पाबिहैं बड़ा मुकाम रे ना। परीक्षा में डरै के नय कोनो बात, मजबूत राऽख अपन जज़्बात। नुनु हंसि कय हल करिहैं…
फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार
फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार चाईनीज खाना चाईनीज प्यार फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार शिक्षा जब बनी व्यापार जिसका न कोई परिवारिक सरोकार फिर कैसे मिले बच्चों में…
परीक्षा केअ एलै बहार-नीतू रानी
परीक्षा केअ एलै बहार बहार मेरी सखिया बच्चा सेअ शोभै स्कूल हमार हमार मेरी सखिया परीक्षा —2। पहिले बच्चा अपन नाम लिखै, बाद में स्कूल, प्रखंड, जिला के नाम लिखै…
मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक
मानवता जो जीवित मन में, उत्तम हर व्यवहार। भरा रहे मन नित खुशियों से, हर जीवों से प्यार।। सरल नहीं है मानव रहना, जिस मन रहता क्रोध। नहीं समस्या जबतक…
चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक
चैत्र पावन मास है। माँ बता क्यों खास है।। नेह से माँ लाल को। चूम उसके भाल को।। आज है बतला रही। राज है समझा रही।। वर्ष की शुरुआत है।…
परीक्षा-नैना कुमारी
खेलकूद में नहीं बिताना बच्चों अपना पूरा साल आएगा मार्च होगी परीक्षा होगा तेरा बूरा हाल गणित के प्रश्न पत्र में होंगे ऐसे टेढ़े मेढे सवाल हिंदी में भी होगा…
अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
वीरों की गाथाओं में है, एक पुराना नाम। वीरांगना अहिल्याबाई, को हम करें प्रणाम।। महाराष्ट्र साम्राज्य मराठा, चौंड़ी नामक गाँव। खण्डेराव संगिनी प्यारी, माहेश्वर थी ठाँव।। सीमाओं के बाहर तक…