Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

पौधे ने माँगा पानी-उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”पौधे ने माँगा पानी-उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”

0 Comments 8:50 pm

हवा रुक गई, ताप बढ़ गया, खेतों में दरार पड़ गया। कड़ी धूप देख मन घबराया, हरे पौधों ने आपस[...]

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तिरंगा-बेबी अर्चनातिरंगा-बेबी अर्चना

0 Comments 7:55 pm

लहराता है तिरंगा धरा-गगन सुरक्षित है अब अपना चमन हवा नहीं, यह फौजी की साँसें बदौलत जिनके शांति-अमन है दीप्त[...]

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Ruchika

आजादी की वर्षगाँठ-रूचिकाआजादी की वर्षगाँठ-रूचिका

0 Comments 7:49 pm

आजादी की 80वाँ वर्षगाँठ हम मना रहे हैं, स्वयं ही अपनी आजादी पर इठला रहे हैं। मगर क्या कभी सोचा[...]

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Ratna Priya

स्वतंत्रता से प्यार-रत्ना प्रियास्वतंत्रता से प्यार-रत्ना प्रिया

0 Comments 7:45 pm

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है , पराधीनता में सुख नहीं , यह जानता संसार[...]

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आजादी का दिव्य पर्व महान-बेबी अर्चना आजादी का दिव्य पर्व महान-बेबी अर्चना 

0 Comments 5:46 pm

है हिन्द-सिंध अपना हिय सनातन आजादी का यह दिव्य पर्व महान गुलामी- कलुषित- कालिमा का आज ही के दिन हुआ[...]

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Kartik Kumar

प्रणाम सर-कार्तिक कुमारप्रणाम सर-कार्तिक कुमार

0 Comments 6:03 pm

प्रणाम सर! — खुश रहो बच्चा, जीवन में तुम आगे बढ़ना। पढ़ाई करो अच्छा-अच्छा, ज्ञान का दीपक सदा जलाना। काम[...]

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सेवाभावी की अभिलाषा – उमेश कुमार सिन्हा सेवाभावी की अभिलाषा – उमेश कुमार सिन्हा 

0 Comments 5:43 pm

नहीं चाहूँ स्वर्णिम वैभव का मुझ पर राजतिलक हो, नहीं चाहूँ यश का सूरज मेरे ही आँगन उदित हो। नहीं[...]

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बचपन की बारात – उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक”बचपन की बारात – उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक”

0 Comments 5:39 pm

एक-एक रुपया जोड़-जोड़कर गुल्लक अपनी भर लाई, दादी के घर बड़े जतन से मैंने एक गुड्डा बनवाई। नानी के घर[...]

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Kartik Kumar

 आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं  – कार्तिक कुमार आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं  – कार्तिक कुमार

0 Comments 7:39 pm

 आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं  – कार्तिक कुमार मन के भीतर उठता दुख, बाहर इसका उपचार नहीं। आध्यात्मिक पीड़ा[...]

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