अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक

अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान में धरे अनंग। अंग-अंग प्रेम रंग।।०१।। श्याम बोलते निहार। राधिका…

गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा

श्रीकृष्ण कहते, तुझमें शक्ति है, तू परंतप, महाबाहो, महावीर है, तू पार्थ, ईश्वर का पवित्र अंश, गुडाकेश, साहसी, परम धीर है, कर्तापन का अभिमान छोड़, मेरे कार्यों में निमित्तमात्र बनता…

होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक

उसके आते नर्तन करती। मन में नव भावों को गढ़ती।। बहकाए वह मेरी बोली। क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।। आते ही उल्लास जगाए। उपवन सरिस बदन महकाए।। करके हर-पल…

महिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठक

नारी के सम्मान की, आज लगी है होड़। पुरुष बिचारा कर रहा, घर-बाहर कर-जोड़।। घर-बाहर कर-जोड़, करे दिल को समझाए। आधा निज का अंग, उसे सामर्थ्य दिखाए।। खुशी आज चहुँओर,…

नारी- राम किशोर पाठक

नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती। जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।। देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती। हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।। ममता…

देवी अवतारी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

संसार की माता बन  संतानों को पालती हैं,  सृष्टि की कीमती रत्न, दुनिया में नारी है। घर हो या राजनीति  तालमेल बैठाती है,  जीवन सफ़र पर, कभी नहीं हारी है।…