घर की कलियाँ- राम किशोर पाठक

घर के उपवन की कलियों को। नेह लुटाती उन डलियों को।। ठीक नही ऐसे बिसराना। करके खाली चित गलियों को।। रही सुबह को जो मुस्काती। मनभावन शोख तितलियों को।। मर…

दियौ बच्चा केअ छुट्टी सरकार यौ – नीतू रानी

दियौ  केअ छुट्टी सरकार यौ,  नै तेअ बच्चा सब बच्चापड़त बीमार यौ। आय तेअ सबसेअ बेसी येअ ठंडा धूप एखैन यहाँ बड़ येअ मंदा, ठंडा सेअ हालत येअ हमर खराब…

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को। कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।। अभावों…

संसार- दोहे – राम किशोर पाठक

संसार- दोहे जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार। अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।। दुख को जो है झेलता, कहे दुखी संसार। खुशियाँ जिसको हैं मिली, वह करता…

राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक

राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक आया यह दिन खास, करना है अहसास, जनवरी पाँच आज, समझ बनाइए। कौआ चील गिद्ध मोर, पक्षियों के भाए शोर,…

दोहे – राम किशोर पाठक

दोहे सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार। संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।। भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत। सरल साधना संग सह, सहज सुलभ सब संत।। शुभद शिवाला…

कैसे समझोगे तुम – बैकुंठ बिहारी

कैसे समझोगे तुम कैसे समझोगे तुम समय को, जिसने लोगों को जीना सिखाया। कैसे समझोगे तुम स्वजन को,  जिसने तुम्हारा मान बढ़ाया। कैसे समझोगे तुम परिजन को,  जिसने तुम्हारा अपमान…

ठंडा – नीतू रानी

ठंडा का महीना  थर- थर कांँपै सब लोग, कोना केअ बनाएब खाना  कि खायत बच्चा मोर। मन नै करैयेअ हम बिछना सेअ निकली  ठंडा पैन सेअ हम बर्तन धोबी, ठंडा…