स्वस्थ जीवन जीने की तैयारी जब जगे तभी सवेरा , यही सोच सदा नित बनी रहे । अब तो स्वस्थ रहने की , यह अक्ल सदा ही ठनी रहे ।…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत – राम किशोर पाठक
गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत मास ज्येष्ठ दशमी को, गंगा भू पर आना। आज दशहरा गंगा, जन-जन में कहलाना।। वंश इक्ष्वाकु जाने, राजा सगर बखाने। अश्वमेध का घोड़ा,…
क्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठक
क्या मैं अबोध हूॅं। माँ सुनो तो, एक बात जरा, क्या मैं अबोध हूॅं ? पाँच वर्ष की हो गयी, बहुत कुछ समझने भी लगी हूँ, तुम्हारे साथ अक्सर हाथ…
सीख- विजात छंद मुक्तक – राम किशोर पाठक
सीख- विजात छंद मुक्तक सदा वाणी सहज बोलें। नहीं विद्वेष को घोलें।। अगर कोई सताए तो। नहीं चुपचाप से रो लें।। अभी बचपन सुहाना है। सभी सपने सजाना है।। दबे…
गरल सहज जो पी लेते हैं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
गरल सहज जो पी लेते हैं मधुर सुधा रस पी लेते हैं, बोलो देखा है कल किसने, प्रतिपल जीवन जी लेते हैं, आओ थोड़ा जी लेते हैं। बैठे गुमसुम गुमसुम…
आतंकवाद मिटाना है – अमरनाथ त्रिवेदी
आतंकवाद मिटाना है केवल खाली खाली बातों से , अब पेट नहीं हमे भरना है , जबतक आतंकवाद खत्म नहीं होता , उससे हरपल ही हमें लड़ना है । आतंकवाद…
मेरी लेखनी – भूषण छंद गीत – राम किशोर पाठक
मेरी लेखनी – भूषण छंद आधारित गीत उठा लेखनी लिखते हम, सदा सत्य को करें प्रबल। सभी यहाँ खुश होते कब, लगे कभी मुश्किल सा पल।। झूठ परोसें कहीं अगर,…
रोकती बीमारियाँ – मनहरण घनाक्षरी
रोकती बीमारियाँ।- मनहरण घनाक्षरी उम्र किशोरी का आया, सौगात नयी है लाया, अंग-अंग है मुस्काया, बढ़ी जिम्मेदारियाँ। प्रजनन की तैयारी, शुरू हुई माहवारी, सहती है दर्द भारी, सदा सभी नारियाँ।…
संख्या का ज्ञान करें प्रदान – राम किशोर पाठक
संख्या का ज्ञान करें प्रदान- बच्चे कोरे कागज जैसे। संख्या ज्ञान कराएँ कैसे।। अंक शून्य से नौ तक रहता। संख्याओं का मेला लगता।। बच्चे इनको समझ न पाते। जबतक अमूर्त…
माँ की सीख- स्रग्विणी छंद – राम किशोर पाठक
स्रग्विणी छंद आधारित माँ की सीख- बाल सुलभ रोज माँ टोकती है सुधारो इसे। दोष तूने किया है निहारो इसे।। भूल कोई उसे है सुहाता नहीं। रोज मैं भी उसे…