Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 7:07 pm

बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

वंदे मातरम् – गीत – राम किशोर पाठकवंदे मातरम् – गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 2:39 pm

वंदे मातरम् – गीत भारत वासी दिल के अच्छे, चाहत सदा स्वच्छंद है। वंदे मातरम् गीत सुंदर, गाना सबको पसंद[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

किसान – राम किशोर पाठककिसान – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:56 am

खेतों का है रंग सुनहरा। जैसे सोना रहता बिखरा।। फसल धान की है खेतों में। श्रम का प्रतिफल है रेतों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक 

0 Comments 10:19 pm

है लोकतंत्र की महिमा न्यारी। चलती जिससे संविधान प्यारी।। सबने बदली अब दुनियादारी। लूट रहे धन कहकर सरकारी।। लेकर सारे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार

0 Comments 6:07 am

माँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग , पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग । मोटे अनाज देंगे हमें[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

तुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरातुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरा

0 Comments 11:52 pm

गीततुम मुझको नारी रहने दोअपनी अधिकारी रहने दो ।। सत्ता का लोभ नहीं मुझकोन  दौलत  की  ही चाहत है पैरों  [...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

राष्ट्रीय एकता दिवस – राम किशोर पाठकराष्ट्रीय एकता दिवस – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:17 pm

राष्ट्रीय एकता दिवस   दिवस राष्ट्रीय एकता वाला। लेकर समरसता का माला।। आओ इसकी कथा सुनाएँ। सरदार पटेल से मिलवाएँ।।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

शब्दों का संसार-राम किशोर पाठकशब्दों का संसार-राम किशोर पाठक

0 Comments 5:44 pm

शब्दों का संसार (१६-१४) शब्दों का संसार अनोखा, होंठ चूमता है रहता। कुछ बसते हैं संग रगो में, कुछ को[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें