Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

नशा मिटाएँ- योग छंद – राम किशोर पाठकनशा मिटाएँ- योग छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:44 pm

नशा मिटाएँ- योग छंद हालत अपनी हरपल, हमें बताएँ। आदत कोई भी हो, नहीं लगाएँ।। हो चाहे कैसी भी, उसे[...]

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आओ कर लें योग – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठकआओ कर लें योग – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:16 pm

आओ कर लें योग – सरसी छंद गीत जीवन है अनमोल मनुज का, मिले विविध संयोग। रहना है नीरोग हमें[...]

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शब्द भेद को जानें – राम किशोर पाठकशब्द भेद को जानें – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:52 pm

शब्द-भेद को जानें देववाणी सुता है हिंदी। भारत माता की है बिंदी।। आओ इसका रूप निहारे। बहती जिसमें भाव हमारे।।[...]

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Amarnath Trivedi

शब्द भेद की व्यापकता – अमरनाथ त्रिवेदीशब्द भेद की व्यापकता – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 8:30 pm

शब्द भेद की व्यापकता अक्षर- अक्षर  से  बनते शब्द , मैं उस शब्द के भेद बताने आया हूँ । उस[...]

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शब्दों के हैं रूप निराले – चौपाई छंद – राम किशोर पाठकशब्दों के हैं रूप निराले – चौपाई छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:28 pm

शब्दों के हैं रूप निराले – चौपाई छंद यूँ जो ध्वनियाँ बोली जाती। भावों को अपने बतलाती।। वर्णों से जो[...]

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मौसम गर्मी वाला आया-चौपाई छंद – राम किशोर पाठकमौसम गर्मी वाला आया-चौपाई छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:17 pm

मौसम गर्मी वाला आया- चौपाई छंद – बाल कविता बिटिया रानी सुनो कहानी। दुनिया करती है नादानी।। कभी न करना[...]

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गौ माता को हम-सब जानें – राम किशोर पाठकगौ माता को हम-सब जानें – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:57 pm

गौ माता को हम-सब जानें – बाल कविता दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस लाना। स्तन्य, पीयूष, दोहज जाना।। सुधा, सोम हीं[...]

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नमन पिता को कीजिए – विधा दोहा – राम किशोर पाठकनमन पिता को कीजिए – विधा दोहा – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:59 pm

नमन पिता को कीजिए- दोहा छंद कहें जनक पालक उन्हें, जिन चरणों में धाम। पिता वचन का मान रख, वनगामी[...]

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पड़ती गर्मी प्रचंड है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठकपड़ती गर्मी प्रचंड है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:53 pm

पड़ती गर्मी प्रचंड है – लावणी छंद गीत ताल, तलैया, सरवर सूखा, भू दिखता खंड-खंड है। प्यासा पंछी खोज रहा[...]

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भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठकभूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:15 pm

भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत भूजल का दोहन करें नहीं, संग्रह बहुत जरूरी है। बसा भूगर्भ में[...]

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