Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

भारत का अभिमान तिरंगा – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’भारत का अभिमान तिरंगा – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 11:45 pm

भारत का अभिमान तिरंगा। हम तो हैं उस देश के वासी, जहाँ बहती नित्य पावन गंगा।। उत्तर में है खड़ा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

तिरंगा – एम. एस. हुसैनतिरंगा – एम. एस. हुसैन

0 Comments 10:18 pm

तीन रंग का अपना झंडा सब देशों से है प्यारा। शान बड़े निराले हैं इसके, यह है सिरमौर हमारा।। केसरिया[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

हर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमारहर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमार

0 Comments 9:51 pm

प्रकृति के हैं रूप अनेक पेड़ है जिनमें से एक। ये जहाँ भी होता है, जीवन खुशियों से भर देता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

खुद मनुष्य बन, औरों को मनुष्य बनाओ- गिरीन्द्र मोहन झाखुद मनुष्य बन, औरों को मनुष्य बनाओ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 5:57 pm

सदा कर्मनिष्ठ, सच्चरित्र, आत्मनिर्भर बनो तुम, जिस काम को करो तुम, उससे प्रेम करो तुम। नित नई ऊँचाई छूकर, सदा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

कभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रविकभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:44 pm

रूप घनाक्षरी छंद तूफानों में नाव डोले, कभी खाए हिचकोले, धारा बीच माँझी चले, थाम कर पतवार। अवसर आने पर,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 5:33 pm

वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:04 pm

सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

किसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकिसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:27 pm

किसने रोका है? अंधेरा घोर घना है, एक बत्ती जलाने से किसने रोका है? प्रदूषण बहुत ही है, एक पेड़[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

लक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झालक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 3:02 pm

लक्ष्य से अधिक है दिशा महत्त्वपूर्ण, सही दिशा में सतत करते रहो प्रयास, यदि दिशा सही हो, तो तू अगर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

माहवारी औरतों के लिए ईश्वरीय वरदान – नीतू रानीमाहवारी औरतों के लिए ईश्वरीय वरदान – नीतू रानी

0 Comments 7:36 am

ईश्वर ने दिया महिलाओं को यह सुंदर वरदान महिलाओं के लिए है यह आन- बान- शान जिसके चलते आज हर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें