पद्यपंकज Bhakti,sandeshparak एक था मोहन-चंचला तिवारी

एक था मोहन-चंचला तिवारी



एक था मोहन

नाम था मोहन जिसमें था अभुतपूर्व सम्मोहन
कृष्णा के नगरी में जन्मे, नाम था मोहन

राम को थे वो ध्याते
जाने कैसे सबके मन में समाते
अहिंसा, सत्य निष्ठा का पाठ पढाते
पाठ सिखलाने को स्वयं थे निभाते
नाम था मोहन जिसमे था अभुतपूर्व सम्मोहन
कृष्णा के नगरि में जन्मे, नाम था मोहन

एकत्रण का निपुर्ण प्रबन्ध
स्वतन्त्रता से अमिट सम्बन्ध
स्वनिर्मित नियमो से तटबन्ध
मानव विकारो पर था प्रतिबंध
नाम था मोहन जिसमें था अभुतपूर्व सम्मोहन
कृष्णा के नगरि में जन्मे, नाम था मोहन

मानव रुप का परमात्मा
गुणखानों का महात्मा
सम्बन्ध और सम्बोधन की आत्मा
प्रासंगिक जिसकी अन्तर आत्मा
नाम था मोहन जिसमें था अभुतपूर्व सम्मोहन
कृष्णा के नगरि में जन्मे, नाम था मोहन

चंचला तिवरी
तपसी सिंह उच्च विद्यालय
चिरान्द, सारण

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