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घूंघट में छुपा चाँद-सा मुख,
नयनों में सपनों का बसेरा।
लाज की कोमल चादर ओढ़े,
मुस्कान बनी मन का सवेरा।
धीमे-धीमे पग धरती पर,
चूड़ियों ने गीत सुनाया है।
पिया की आहट पाकर दिल ने,
पहली धड़कन को पाया है।
घूंघट केवल परदा नहीं,
मर्यादा की है यह पहचान।
संकोच, समर्पण, विश्वास का,
नारी के मन का अभिमान।
जब उठती हैं लाज भरी पलकों,
तो प्रेम स्वयं झुक जाता है।
बिन बोले जो कह दे सब कुछ,
वही सच्चा रिश्ता कहलाता है।
पिया की आँखों में बस जाने,
का सपना मन में पाला है।
हर श्वास समर्पित प्रेम बने,
यह प्रण हृदय ने ढाला है।
घूंघट में भी उजियारा है,
सिंदूरी सपनों की धूप।
जहाँ संस्कारों संग मुस्काए,
श्रृंगार का मधुर स्वरूप।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी
राघोपुर,सुपौल

