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ईश्वर के इंसाफ -जैनेन्द्र प्रसाद


Janindra Prasad Ravi

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ईश्वर के इंसाफ

ले के भारी आफत जाड़ा अइहलै तिल सकरात में,
लड़का बड़का में नय अंतर दिखs हय दिन रातमें।

रात में रजाई तान सोवे नींद सुखिया,
करवट बदल रात काटे दीन-दुखिया।
गरीब बोरसी ले के सुते रोज अप्पन साथ में।
लड़का बड़का में नय अंतर दिख हय दिन-रात में।।

कोय खा हय दही दूध कोय मीट मछली,
कोय खा हय हलवा-पूरी कोय पुलाव- कतली।
मुनिया खा हय रोज मिला के नीमक बासी भातमें।
लड़का बड़का में नय अंतर……..!

कोय पेन्हें है मफलर टोपी कोय पेन्हें है कोटवा,
केकरो जाड़ा में थर-थर कांँपे हाथ-होठवा।
कोय दरवाजे खड़ा कटोरा ले के खाली हाथ में।।
लड़का बड़का में नय अंतर……!

धन के धमाल करे कोय मनावे पटिया,
कोय काटे भूईयां में रात टूटल घर खटिया।
गरीबी फरक नय कर हय धरम औ जात में।
लड़का-बड़का में नय अंतर…….!

भले तोरो नय दिखे दम आज हम्मर ई बात में,
ईश्वर के इंसाफ सही हय कि गरीब के साथमें।।

जैनेन्द्र प्रसाद रवि

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