पद्यपंकज Uncategorized पहले देश फिर शेष – जैनेंद्र प्रसाद रवि

पहले देश फिर शेष – जैनेंद्र प्रसाद रवि


Jainendra

पहले देश फिर शेष

त्रिभुवन में ना ऐसा,
कोई है भारत जैसा,
सबसे सुंदर प्यारा, हमारा ये देश है।

माटी का चंदन कर
वीरों को नमन करें,
पहले है मातृभूमि, फिर कुछ शेष है।

सागर की लहरें हैं,
नदी झील झरने हैं,
हरा भरा बाग-वन, स्वच्छ परिवेश है।

विकास की आई क्रांति,
चहुंँओर फैली शांति,
आपस में द्वंद नहीं, ना किसी को क्लेश है।

जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

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