भक्त की आशा यही है, भक्त को माँ तार दे।
भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।।
पुष्प श्रद्धा भक्ति का मैं, ले शरण में आ गया।
कर क्षमा हर भूल मेरा, देख लो करके दया।।
ज्ञान वाणी मातु मेरी, बुद्धि को नव धार दे।
भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।।०१।।
मैं धवल पथ पर चलूँ नित, लक्ष्य भी आसान हो।
जीत लूँ सबके हृदय को, विश्व में सम्मान हो।।
शुभ्र सारे कर्म करना, धर्म का आधार दे।
भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।।०२।।
संग में परिवार सारा, प्रेम का मकरंद ले।
राष्ट्र का उत्थान से हम, सुख सहज आनंद ले।।
दिव्यता से युक्त सारी, सौम्यता संसार दे।
भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार
संपर्क – 9835232978
