हाॅं यह मेरा बिहार है,
हाँ यह अपना बिहार है।
इतिहास जिसके कदम चूमे,
हाँ वह मेरा बिहार है।
जहाँ बुद्ध, महावीर का त्याग छाया,
सत्य – अहिंसा का संदेश लाया।
अशोक की धर्म शिलालेख भाया,
वीरों की गौरव गाथा गाया।
हाॅं यह मेरा बिहार है।
जहाँ चाणाक्य की नीति जन्मी,
शिक्षा और ज्ञान की ज्योति पनपी।
नालंदा, विक्रमशिला की शिक्षा फली,
यही से भारत की पहचान बनी।
हाँ यह मेरा बिहार है।
जहाँ दिनकर की कविता, रेणु का सार है,
शारदा सिन्हा की लोगगीत, विद्यापति का संसार है।
प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र, जेपी की हुंकार हैं,
माँ गंगा की पावन धारा, कुंवर सिंह की तलवार है।
हाॅं यह मेरा बिहार है।
जहाँ आर्यभट्ट ने विश्व को शून्य सिखलाया,
वाल्मीकि की रामायण सत्य मार्ग दिखाया।
मिथिला पेंटिंग को देश-विदेशों में फैलाया,
अपनी मानवता का पहचान बनाया।
हाँ यह मेरा बिहार है।
हाॅं यह अपना बिहार है।
रचियता- मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी
प्रखण्ड- झंझारपुर, मधुबनी

