संवत्सर प्रारंभ नव, प्रथम दिवस है आज।
आदि शक्ति शुभ शैलजा, पूजे सकल समाज।।
आदि शक्ति के रूप का, दर्श प्रथम कर आज।
भक्ति भाव से पूजकर, हर्षित सकल समाज।।
मातु शैलजा को नमन, करता बारंबार।
भक्ति भाव जो बन सके, मातु करो स्वीकार।।
मंगलमय नववर्ष हो, माँ दे दो आशीष।
डटे रहे निज कर्म पथ, झुके नहीं उष्णीष।।
पुष्प चुनरिया ओढ़कर, धरती कर शृंगार।
स्वागत करती मातु की, स्नेहिल भाव निहार।।
जय माता की बोलिए, रखकर मन उत्साह।
सँवरेंगे सब काम अब, नयी मिलेगी राह।।
हृदय द्वार को खोलकर, दे नारी सम्मान।
मातु शैलजा हो वरद, देती शुभ वरदान।।
है वसंत नवरात्र है, सबमें भरा उमंग।
धानी चूनर ले धरा, विविध कुसुम के रंग।।
जय अम्बे की गूँज से, गूँज रहा आकाश।
भक्त सभी भय मुक्त हो, दुष्टों का हो नाश।।
“पाठक” पग धर शैलजा, कहे मातु मैं दास।
दया दृष्टि वरना सदा, करे न जग उपहास।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978

