होली का त्यौहार -नीतू रानी


शीर्षक-होली का त्योहार

होली है हिन्दुओं का त्योहार
लोग लगाते हैं एक-दूसरे के गालों में रंग गुलाल,
खाते हैं सब पुआ और खीर
गाते हैं जोगीरा सारा रा रा।

सभी जानते हिरण्यकश्यप का नाम
था वह राक्षस अभिमानी शैतान,
सबको कहता मुझको पूजो
क्योंकि मैं हूँ तुम्हारा भगवान।

हिरण्यकश्यप के डर से थर-थर काँपता था दरबार
उसके पुत्र का नाम था विष्णु भक्त प्रह्लाद,
जिसने नहीं मानी अपने पिता की बात
कहा प्रह्लाद आप मेरे भगवान नहीं हो सकते
सिर्फ आप हैं मेरे बाप।

हिरण्यकश्यप ने जैसे सुनी प्रह्लाद की बात
उसने कहा तेरी ये औकात,
जिसने -जिन्हौंने काटी है मेरी बात
वो इस संसार को छोड़कर चले जाते हैं दूसरे संसार।

हिरण्यकश्यप की थी एक होलिका बहन
जिसको आग में नहीं जलने का मिला था वरदान,
बोला प्रह्लाद को गोदी में लेकर तुम चिता बैठ जाना
तुम नहीं जलोगी बहन जलेगा मेरा प्रह्लाद संतान।

खुशी-खुशी बैठ गई होलिका गोदी में लेकर प्रह्लाद
चारों तरफ से लगा दी गई बने हुए चिते में आग,
होलिका ने की ,दिए हुए ईश्वर के वरदान की अवेहलना
इसीलिए प्रह्लाद नहीं जलकर
होलिका हीं जलकर हो गई राख।

उसी दिन से हम मनाते हैं होली का त्योहार
मिटाकर जाति-पाति छुआछूत भेदभाव और अहंकार,
हम सभी होली मनाते हैं एकसाथ और माता-पिता गुरुजनों से लेते हैं आशीर्वाद।

नाम -नीतू रानी , विशिष्ट शिक्षिका, स्वरचित होली पर कविता।
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply