विषय -श्रीराम।
शीर्षक -यही है तेरा धर्म।
आसन पर बैठे श्रीराम हैं पलथी मारे,
देख रहे हैं सभी लोगों के क्रिया कलापों को सारे।
क्या- क्या कर रहे लोग नोटिस कर नजर में रखते,
सभी के नाम के आगे वो कर्म फल को लिखते।
कौन-कौन जप रहा प्रभु का नाम है नित्य दिन,
कौन कर रहा पाप और कौन पुण्य को निश दिन।
झूठ बोलकर कौन जीत रहा इस जग में,
पुण्य कर्म करके क्यूँ फँस रहा नर तन में।
इसीलिए करते रहना सब शुभ हीं शुभ कर्म,
मनुष्य शरीर में आए हो यही है तेरा धर्म।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका, स्वरचित श्रीराम कविता।
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

