चौसर – रुचिकाचौसर – रुचिका

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चौसर जिंदगी के चौसर पर हम रहेंबस एक मोहरेंचाल ऊपर वाला चलता रहा।कभी शह, कभी मात वह देताऔर दर्प इंसानों[...]

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धूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानधूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

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मदिरा सवैया211-211-211-211=211-211-211-2 धूप कहाॅं दिखती अपना घर। काॅंप रही किरणें अब ऑंगन,देख प्रभा यह पस्त हुई।गर्म हवा अब भाग रही[...]

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Ram Kishor Pathak

दस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठकदस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठक

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विधाता छंद मुक्तक जिसे रोना नहीं आया उसे कोई नहीं समझा।गमों के दौर से बोलो नहीं वह कौन जो उलझा।सदा[...]

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किताबों की ओर लौटो – अवधेश कुमारकिताबों की ओर लौटो – अवधेश कुमार

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किताबों की ओर लौटो – किताबों की ओर लौटो फिर से, ज्ञान के दीप जलाओ फिर से। इन पन्नों में[...]

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Ram Kishor Pathak

शरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठकशरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठक

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शरद पूर्णिमा- महामंगला छंद गीत स्वागत करती किरण, सोम देव मुस्कात। सुरभित शीतल शरद, मनभावन यह रात।। रजनी व्याकुल अजब,[...]

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कल से पक्का पढूंगा – अवधेश कुमारकल से पक्का पढूंगा – अवधेश कुमार

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कल से पक्का पढ़ूंगा – बाल हास्य कविताआज बहुत रात हो गई ,फिर वही बात,कॉपी खुली है पर नींद का[...]

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Ram Kishor Pathak

जिंदगी – राम किशोर पाठकजिंदगी – राम किशोर पाठक

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जिंदगी -सूर घनाक्षरी एक रास्ता है जिंदगी,आओ कर लें बंदगी,त्याग चित की गंदगी, चलते जाइए।कर्म धर्म मर्म ज्ञान,अपना पराया जान,सबको[...]

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शरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रविशरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रवि

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शरद् ऋतु का दस्तक अंधकार छंटते हीं, रवि की सवारी आया, बैठ तरु डाल पर, करते परिंदे शोर। पछियाँ जो[...]

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