जनगणना गीत हे बहिना जाय छी करै लय जाति जनगणना कार्य हे गरमी में सबके अंगना द्वार हे ना। जाय छी सबके अंगना द्वार लैछी सबकेअ नाम पुकार हे बहिना…
बारिश- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
छाई घटा घनघोर, जंगल में नाचे मोर, श्याम धन संग-संग, झूमे आसमान ये। बागों में बहार आई, तितली भी इठलाई, बारिश की बूंदे साथ, कोयल की तान ये। दिल में…
कवित्त छंंद- एस.के.पूनम
घनघोर घटा छाई, बारिश की बूंदें लाई, धरा ताप भूल गई, देखे आसमान ये। घुमड़-घुमड़ कर, गगन में नाच कर, चमक गरज चले,आए मेहमान ये। नदी-नाले भरे जल, किसान चलावे…
मैं तैयार हूं -जयकृष्णा पासवान
कितने ज़ख्म सहे हैं हमने, छांव छोड़कर धूप खाये है हमने। “अपमान की आग से ” झुलसा है बदन मेरा।। “परीक्षाओं से निखरा है ” चमन मेरा। “ललाट के चमक…
सुहाना मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद ठंडी-ठंडी हवा चली, मुरझाई कली खिली, देखो नीला आसमान, काला घन चमके। कोयल की सुन शोर, छाई घटा घनघोर, चारों दिशा झमाझम, वर्षा हुई जम के। काम…
मजदूर- मीरा सिंह “मीरा”
माना नहीं मशहूर वह सबकी आंखों का नूर वह। नित नया रचता रहे कुछ हम सबका है गुरुर वह।। काम करता है विविध कहलाता है मजदूर वह। दिख जाता हर…
श्रमिक की व्यथा-कथा- सुरेश कुमार गौरव
मैं भी शान से जीना चाहता हूं मेहनत की रोटी कमाता हूं, दृढ़ शौक है मेरे भी कुछ, बच्चों को खूब पढ़ाना चाहता हूं, लेकिन कभी अप्रवासी बनकर बिलकुल बेगाने…
मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
(रूप घनाक्षरी छंद) ठंडी-ठंडी हवा चली, सूखी मिट्टी हुई गीली, धूल भरी आंधी लाया, बादल ने बूंदों संग। हाँफ रहे पेड़ पौधे, सभी खड़े दम साधे, तन में पसीना आया,…
बाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनी
अपने बचपन को खोता कितना वह लाचार। मलिन सी काया,दुर्बल छवि,जीर्ण- शीर्ण आकार। अत्यंत आवश्यक प्यासे को पानी भूखे को आहार। मांसाहार नहीं,उसे भोजन मिल जाए शाकाहार। पर लोगों का…
पुस्तक- मीरा सिंह “मीरा
पुस्तक होती ज्ञान दायिनी सबको राह दिखाती है। मानव का सच्चा साथी बन हर पग साथ निभाती है।। अम्मा बन गाती है लोरी नानी बन कथा सुनाती है। सुख दुख…