मैं पंछी बन उन्मुक्त गगन में, दुनियां का भ्रमण करुं। काली-घटा की बलखाती बादल में भींग जाऊं।। यह मेरी अभिलाषा है। मैं सूर्य के प्रकाश की तरह, प्रकाश-मान हो जाऊं।…
पढ़ाई -दीपा वर्मा
दुहाई है दुहाई हाय ये पढ़ाई । कभी नन को नही भाए यह जालिम पढ़ाई । मम्मी कहती..पापा कहते दादी कहती..दादा कहते समी कहते, पढो पढ़ो। खेलकूद हो गया मुश्किल…
विज्ञापन अंतिम संस्कार का- संजय कुमार
ऐड देख कर खुश मैं होऊँ या आँखें भर भर मैं रोऊँ। खोया जिसके लिए था सब कुछ हुआ वही नजरों से दुर्लभ अंतिम संस्कार का ऐड देखकर खुश मैं…
एक सच्चाई- नवाब मंजूर
सत्य से जो दूर है वही मद में चूर है लोभ भी भरपूर है इसी भ्रम में मानता स्वयं को, वही एक शूर वीर है। रौंदता जाता सबको जाने रब…
विद्या-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
छंद:-मनहरण घनाक्षरी ‘रवि’ सारे छोड़ काम, थोड़ी देर राम – राम, खाट छोड़ उठ जाएं, सूरज से पहले। शक्कर की चाशनी में, वाणी को लपेट कर, कई बार सोचें हम,…
तस्वीर-जयकृष्णा पासवान
🌹🌹 तस्वीर 🌹🌹 फटी हुई दिवारों पर , एक लकीर बनाई है। कोरे कागज़ पर किस्मत की , एक तस्वीर सजाई है।। सुख-दुख के गहनों से , सजी है जिंदगी।…
प्रेम-अमरनाथ त्रिवेदी
प्रेम प्रेम से बड़े न दूजो आन । प्रेम से बड़े न दूजो आन ।। प्रेम जहाँ फलता – फूलता है , मिलता विजय , श्री, सम्मान । प्रेम बिना…
अलख जगाएँ-मीरा सिंह
अलख जगाएँ सोच समझकर कदम बढ़ाएँ इस दुनिया में नाम कमाएँ। जीवन धन अनमोल मिला है इस जीवन का मान बढ़ाएँ। मिल जाए गर विपदा कोई तनिक नहीं उससे घबराएँ।…
शीत-एस.के.पूनम
छंद:-मनहरण घनाक्षरी “शीत” सघन है काली रात,रौशनी है थोड़ी-थोड़ी, बंद हुआ घर-द्वार,जाड़े का आलम है। सूर्य ढ़का तुहिन से,घूप थोड़ा निकाला है, आलस्य डेरा डाला है,सर्दी का पैगाम है। चहल-पहल…
दहलीज में सिमटी जिंदगी का सबक- विकास कुमार
भीड़ भरी इस दुनिया में कूप सन्नाटा पसरा है। जब हवा ही कातिल हुई, फिर किस सांस का आसरा है।। घुटनों के बल अब सत्ता है। दंभ, ज्ञान,सामर्थ्य अब, लगता…