शब्द साधना…रामकिशोर पाठक

मरहठा माधवी छंद शब्द साधना अगर, सब्र साधना, स्वयं साधा करे।शिल्प देखिए सहज, और सीखिए, मौन बाधा हरे।।अर्थ जानिए सदा, हर्ष मानिए, गर्व आधा धरे।यत्न कीजिए सरल, आज कीजिए, ज्ञान…

हर पल मर्यादा में रहना – राम किशोर पाठक

हर-पल मर्यादा में रहना – गीत शब्दों की कर हेराफेरी, नित्य नया कुछ चाहूँ कहना।मन को अपने समझाता हूॅं, हर-पल मर्यादा में रहना।। अक्सर देखा है दुनिया में, अहम भाव…

मैहर वाली मैं हर दें गर- राम किशोर पाठक

गीत सुख में जाए दिन-रात गुजर।मैहर वाली मैं हर दें गर।। सुंदर मनहर गीत लिखा है।माता से निज प्रीत लिखा है।।शब्दों का नवनीत लिखा है।भक्ति भावना रीत लिखा है।।आनंदित करता…

कब तक कोई अपना- राम किशोर पाठक

कब-तक कोई अपना- गीत छोटे-छोटे शब्दों से मन टूटेगा। कब-तक कोई अपना हमसे रूठेगा।। अपनों में तो खिच-खिच होती रहती है। खट्टी-मीठी यादें बनती रहती है।। मन का हर गुब्बारा…

नहीं विश्वाश होता है -रामपाल पाल प्रसाद सिंह

गीत(विधाता छंद) नहीं विश्वास होता है सनातन धर्म अभ्यागत,धरा को लहलहाया है। नहीं विश्वास होता है,कि मानव ने बनाया है।। रहा पूरब सदा उज्ज्वल,सभी यह ग्रंथ कहते हैं। कुटुंबी भाव…

बेटा का अधिकार – जैनेन्द्र प्रसाद

बेटा का अधिकाररूप घनाक्षरी छंद में जनता है आती याद,हर पांँच वर्ष बाद,नेता की है आस टीकी, आपके इंसाफ पर। कहते हैं माई-बाप,मलिक हैं मेरे आप,कृपा कर एक वोट, दे…

कोशी के पार लौटती नाव- अवधेश कुमार

कोसी के पार लौटती नाव : नाविक की दर्द भरी दास्तान नाविक चल पड़ा धीरे-धीरे,हवा के संग, उम्मीदों की ओरगहरे जल की गोद में छुपे,वापसी की आस हर छोर। सालों…

देवता साक्षात् नभ से…राम किशोर पाठक

गीत (गीतिका छंद) कष्ट हरना है जगत का, आज यह समझा गए।देवता साक्षात नभ से, पूछने हैं आ गए।। पर्व पावन है सदा ही, प्रेम महिमा कह रही।भाव की सरिता…