ठंढ़ है प्रचंड डस रहा बन भुजंग। बह रही सर्द हवा कांप रही है धरा। छाया घना कोहरा बह रही[...]
पिता एक संपूर्ण विकास प्रदाता- सुरेश कुमार गौरवपिता एक संपूर्ण विकास प्रदाता- सुरेश कुमार गौरव
पिता एक अस्तित्व हैं जिसके रहने से स्थायित्व का बोध होता है घने वृक्ष की छाया में शांति का अनुभव[...]
अंगिका गीत- जयकृष्णा पासवानअंगिका गीत- जयकृष्णा पासवान
दही चूड़ा चीनी आलूदम हो, हमरा नामन लगैय छै। नामन लगैय छै हमरा…२।। देखैल चलो मसूदन के द्वार- हो… हमरा[...]
चाहत – अमरनाथ त्रिवेदीचाहत – अमरनाथ त्रिवेदी
जीवन मे प्रेम का आधार हो , इसमें न छल व्यापार हो । न कालिमा -सी बात हो , न,[...]
मकर संक्रांति- नीतू रानीमकर संक्रांति- नीतू रानी
हे बहिना आय छीयै मकर संक्रांति त्योहार हे, चलअ खेबै दही चूड़ा लाय हे ना । आनबै बाजार सेअ तील,[...]
मौसम का असर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का असर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद दही-चूड़ा,तिल खा के, सूरज है अलशाया, कुहासे में दिखता है, धुंधला गगन है। पेड़ों की डालियों से[...]
मकर संक्रांति- संजीव प्रियदर्शीमकर संक्रांति- संजीव प्रियदर्शी
स्वागत करें उत्तरायण रवि का हम सब मिलकर आज। और उड़ाएं नील गगन बीच पतंगों की परवाज। कहीं तिल की[...]
चुप्पी कलम की- गौतम भारतीचुप्पी कलम की- गौतम भारती
कलम! तू क्यों चुप है ? कुछ तो बोल । इंसानों की इंसानियत पर बोल , काबिलों की काबिलियत पर[...]
मृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरवमृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरव
जल की लहरों की भांति मिथ्या प्रतीति है यह धरा के उपर भी कड़ी धूप सी लगती है यह। गर्मी[...]
नमन युवा शक्ति विवेकानंद- एस.के.पूनमनमन युवा शक्ति विवेकानंद- एस.के.पूनम
मनहरण घनाक्षरी(पहचान है) राष्ट्र धरोहर कहूँ, कहूँ चिन्तक साधक, युवा किया अभिमान,दिलाया सम्मान है। नरेंद्र झुकाए शीश, मिला गुरु का[...]
