किसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रवि

कार्तिक है बीत रही,रबी अभी लगी नहीं,आसमां में काले घन, दिखा रहे नैन हैं। खेतों में   तैयार  धान, आती नहीं खलिहान,तब तक हलधर, रहते बेचैन हैं। डर है बादल  कहीं-…

बाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमार

अस्ताचल सूरज को, हम सब ही प्रणाम करें,उगते सूरज और छठ माता की पूजा, सच्चे मन से करें। संध्या अर्घ्य की रौशनी, जीवन में लाएँ,मन की सारी इच्छा, छठ में…

चुनावी जुमला..जनेंद्र प्रसाद ‘रवि’

वादे करते हैं सभी, पूरा करते न कभी,जुमला साबित होता, आया हर बार है। धर्म का सहारा ले के,जाति की दुहाई दे के,सामने से हाथ जोड़े, आता उम्मीदवार है। नौकरी …

प्रभाती पुष्प -जैनेंद्र प्रसाद

प्रभाती पुष्प सूर्य देव से प्रार्थना मनहरण घनाक्षरी छंद नर-नारी संत-यति, उपवास रख ब्रती,! धन बल पुत्र हेतु, करते उपासना। छठ माता करें दया, मांँगते निरोगी काया, जल बीच खड़े…

आओ छठ पर्व मनाएं शैलेन्द्र कुमार

आओ छठ पर्व मनाएं एकता, भाईचारा, सौहार्द फैलाएं आओ छठ पर्व मनाएं।। नहाए खाए, सहना, खड़ना रस्म निभाएं आओ छठ पर्व मनाएं।। त्याग, संयम, सात्विकता अपनाएं आओ छठ पर्व मनाएं।…

छठ की गरिमा -अमरनाथ त्रिवेदी

2  छठ पर्व की गरिमा वंश   परम्परा    चलती   रहे , सुख   से जियें    लोग  सभी । कामना   करते छठ  व्रती  यही , बन जाए सबकी  बात   सभी । जन जन मे ऐसी ज्योति जली  है , जो भावों को…

मर्द -दीपक कुमार

मर्द – क्या मर्द को दर्द नहीं होता ? होता जरूर है । पर वह बयां नहीं करता। जिम्मेदारियां! चुप करा देती है उसे , पूर्ण विराम की तरह। घर…

विवशता में सिसकते हैं -एस के पूनम

विधा:-विधाता छंद।व्यंग।(विवशता में सिसकते हैं ) चुनावों के समय पर ही,प्रजा की याद आती है। करे वादें सभाओं में,प्रजा सुनकर लुभाती है। बिछाया जाल शब्दों का,ललक जो खींच लाती है।…