ठंड का प्रभाव – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ मनहरण घनाक्षरी छंद जाड़े में जो कुहासे से बढ़ जाती ठंड जब, अत्यधिक होती नमी, शीतल पवन में। कभी बढ़ जाती सर्दी, कभी…
बगिया (बिहारी मोमोज) – मनु कुमारी
बगिया (बिहारी मोमोज) – मनु कुमारी बगिया ! मिथिलाक व्यंजन ,पौष्टिकता सौं भरपूर । घूर तापू सब मिल बगिया खाउ जरूर।। इ अछि मिथिलाक समृद्ध, पाककला के निशानी। एकरा प्रेम…
बसंत- दोहा छंद गीत – राम किशोर पाठक
बसंत- दोहा छंद गीत – राम किशोर पाठक सर्दी से है काँपते, जाने कब हो अंत। हमें बचाने आ रहा, मनहर मृदुल बसंत।। हर मौसम में हो रहा, अक्सर सबको…
पहले स्वास्थ्य मायने रखता – मनु कुमारी
मैडम जी! मैडम जी! कब खुलेगा हमारा प्यारा यह स्कूल ? हम बच्चों के बिना आप विद्यालय आतीं हैं , ये है कहां का रूल।। बच्चों! भीषण शीतलहर के कारण,…
घर की कलियाँ- राम किशोर पाठक
घर के उपवन की कलियों को। नेह लुटाती उन डलियों को।। ठीक नही ऐसे बिसराना। करके खाली चित गलियों को।। रही सुबह को जो मुस्काती। मनभावन शोख तितलियों को।। मर…
दियौ बच्चा केअ छुट्टी सरकार यौ – नीतू रानी
दियौ केअ छुट्टी सरकार यौ, नै तेअ बच्चा सब बच्चापड़त बीमार यौ। आय तेअ सबसेअ बेसी येअ ठंडा धूप एखैन यहाँ बड़ येअ मंदा, ठंडा सेअ हालत येअ हमर खराब…
नव वर्ष के एलै बहार – नीतू रानी
नव वर्ष के एलै बहार बहार मेरी सखिया, नजदीक एलै पर्व त्योहार त्योहार मेरी सखिया। नव वर्ष केअ —–२। तिला संक्रांति एलै महाशिवरात्रि एलै, एलै राष्ट्रीय त्योहार त्योहार मेरी सखिया।…
आँसू और खामोशी-कुण्डलिया – राम किशोर पाठक
आँसू और खामोशी- कुण्डलिया आँसू मेरे नैन में, पत्नी देखी आज। तंज कसी जमकर तभी, कैसा रहा मिजाज।। कैसा रहा मिजाज, समझ मुझको है आई। दो दिन पीहर वास, हमारी…
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को। कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।। अभावों…
मन वीणा की तुम झंकार बनो – मनु कुमारी
मन वीणा की तुम झंकार बनो – मनु कुमारी तुमपर तन मन दुनियां वारी, भटकी मैं प्रेम की गलियारी। सुध – बुध अपनी मैं भूल गई, मैं लोक लाज सब…