14 फ़रवरी का दिन था,
दर्द भरी वह घड़ी आई,
पुलवामा की धरती रो पड़ी,
जब वीरों पर आफ़त छाई।
चलते थे काफिले वीर जवान,
दिल में देश का मान लिए,
मां भारती की रक्षा खातिर,
अपने प्राणों का दान दिए।
अचानक गूंजा धमाके का शोर,
आसमान भी कांप उठा,
मिट्टी-मिट्टी में मिलकर भी
हर सैनिक अमरत्व को पा गया।
मां की आंखें नम हो गईं,
पत्नी का सुहाग रो पड़ा,
बच्चों ने जब पूछा “पापा कब आएंगे?”
तो हर दिल अंदर से टूट पड़ा।
पर याद रहे यह बलिदान,
देश सदा ऋणी रहेगा,
हर भारतवासी के दिल में
उनका नाम सदा जगेगा।
शत-शत नमन उन वीरों को,
जिन्होंने जान लुटा दी,
भारत माता की रक्षा में
हंसते-हंसते बलि चढ़ा दी।
वचन हमारा, यह संकल्प है—
न भूलेगा देश कभी वह दिन,
पुलवामा के अमर शहीदों को
शत-शत नमन, बारम्बार अभिनन्दन।
कार्तिक कुमार
मध्य विद्यालय कटर माला गोरौल वैशाली
7004318121
