लिपट-लिपट मैं जिसके रहती।
शीत लहर को हँसकर सहती।।
संग मुझे लगता सुखदाई।
क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०१।।
रंग विरंगा रूप सलोना।
भूलूँ संग शीत का रोना।।
संग में आती अंगराई।
क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०२।।
लिपट गले हम रात बिताए।
साथ हमेशा मन को भाए।।
जिससे मिलकर मैं अलसाई।
क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०३।।
तन में गर्मी का एहसास।
मेरे मन को अब मिला रास।।
जी भर उससे खुशियाँ पाई।
क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०४।।
चिपके तन से जब वह रहता।
आनंदित मन मेरा करता।।
अच्छी नींद संग में आई।
क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०५।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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