रजाई- राम किशोर पाठक 

Ram Kishore Pathak

लिपट-लिपट मैं जिसके रहती।

शीत लहर को हँसकर सहती।।

संग मुझे लगता सुखदाई।

क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०१।।

रंग विरंगा रूप सलोना।

भूलूँ संग शीत का रोना।।

संग में आती अंगराई।

क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०२।।

लिपट गले हम रात बिताए।

साथ हमेशा मन को भाए।।

जिससे मिलकर मैं अलसाई।

क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०३।।

तन में गर्मी का एहसास।

मेरे मन को अब मिला रास।।

जी भर उससे खुशियाँ पाई।

क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०४।।

चिपके तन से जब वह रहता।

आनंदित मन मेरा करता।।

अच्छी नींद संग में आई।

क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०५।।

रचयिता:- राम किशोर पाठक 

प्रधान शिक्षक 

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

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