राम वन से आ गये।
देवता बन भा गये।।
सूचना से राष्ट्र में।
हर्ष पूरे छा गये।।
शोक चौदह साल का।
आज खुद से ढा गये।।
आरती की थाल ले।
नारियाँ सब आ गये।।
प्रेम नैनों में दिखा।
धार सा छलका गये।।
दौड़कर आती हुई।
मातु दर्शन पा गये।।
नेह से लिपटे गले।
प्राण तन लौटा गये।।
कैकई की बेबसी।
दर्श में बिसरा गये।।
राम को जो चाहते।
राम को थे पा गये।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978
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