हनुमान- कहमुकरी
संग कभी भय नहीं सताता।
साहस मुझमें भी उपजाता।।
शंका का करता समाधान।
क्या सखि? साजन! न सखि! हनुमान।।०१।।
सबसे ज्यादा है बलशाली।
तन पर डाले फिरता वाली।।
रहता मुझसे है वह सहमत।
क्या सखि? साजन! न सखी! हनुमत।।०२।।
वह सुंदर ज्ञानी विज्ञानी।
मैं बनकर उनकी दीवानी।।
पूजन करती मानकर ईश।
क्या सखि? साजन! न सखी! कपीश।।०३।।
अतुल वेग का है वह स्वामी।
सन्मुख टिके नहीं खल कामी।।
मिलूँ उसे दे दुर्गुण आहुति।
क्या सखि? साजन! न सखी! मारुति।।०४।।
सामने कोई टिक न पाता।
सपने पूरी कर वह जाता।।
उसके सारे निराले ढंग।
क्या सखि? साजन! न सखि! बजरंग।।०५।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978
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