मान मिल जाए- गजल
१२२२-१२२२, १२२२-१२२२
दबे कुचले यहाँ जो भी, उन्हें सम्मान मिल जाए।
रहे कानून में समता, सही पहचान मिल जाए।।
हमें रखना सदा होगा, यहाँ पर ध्यान सबका ही।
करे हम कुछ सदा ऐसा, जगत गुणगान मिल जाए।।
निगाहों में रहे हर-पल, गरीबों के लिए पानी।
मदद कर दें जरा उनको, उन्हें भी स्थान मिल जाए।।
कुटिलता भाव को छोड़ें, मिलें हँसकर यहाँ सबसे।
बहाएँ प्रेम की गंगा, सुखद चित स्नान मिल जाए।।
तमन्ना राष्ट्र हित रखकर, करें हम काम नित सारे।
बढ़ेगा राष्ट्र जब अपना, स्वत: उत्थान मिल जाए।।
सदा हम गर्व से कहते, जगत में श्रेष्ठ है भारत।
तिरंगा भी गगन छू लें, जगत को भान मिल जाए।।
नजर को जो उठा देखा, टिका कोई नहीं अबतक।
हमारे शौर्य के आगे, सदा अरि हान मिल जाए।।
रहे समरस सदा ही हम, सभी को सीख है देना।
नजरिया दें बदल सबका, सभी का ध्यान मिल जाए।।
तिलक भू धूल से करके, सदा तैयार रहना है।
वतन मेरा वतन से हम, सभी को ज्ञान मिल जाए।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
