सूर्य रश्मियाँ रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

सूर्य रश्मियाँ- महाशिव छंद गीत
२१२-१२१-२२१-२१२-१२

नित्य सूर्य रश्मियाँ तेज को बिखेरती।
दृष्टि बोध को भरे चित्र को उकेरती।।

लुप्त हो कभी कभी रूष्टता प्रमाण दे।
क्रुद्ध हो गई कभी तो वही कृपाण दे।।
मौन हो कभी कभी नेत्र जो तरेरती।
नित्य सूर्य रश्मियाँ तेज को बिखेरती।।०१।।

दिव्यता भरे यही विश्व सार मान ले।
प्राण दायिणी यही और यही जान ले।।
नैन क्रोध में लिए ज्ञान को घुसेड़ती।
नित्य सूर्य रश्मियाँ तेज को बिखेरती।।०२।।

रूप भी अनूप भी रश्मियाँ किया करे।
धन्यवाद शौक से शर्तिया दिया करे।।
प्यार से गले लगा चर्म भी उधेड़ती।
नित्य सूर्य रश्मियाँ तेज को बिखेरती।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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