पद्यपंकज Uncategorized दिखे की दुखी तुझको -रामकिशोर पाठक

दिखे की दुखी तुझको -रामकिशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

दिखे कोई दुखी तुझको उसे गम से निकाला कर- गजल

दिखे कोई दुखी तुझको उसे गम से निकाला कर।
बिना सोचे गले लगकर जरा कुछ नेह डाला कर।।

करेंगे लोग अक्सर ही तुम्हारे साथ में उल्टा।
अगर गुस्सा कभी आए उसे कुछ देर टाला कर।।

करेंगे सब यहाँ कोशिश तुम्हें हर-पल गिराने की।
मगर रख हौसला खुद पर हमेशा कुछ निराला कर।।

जलें है लोग जो तुझसे वही बातें करे मीठी।
मगर दिल में कभी भी खास रंजोगम न पाला कर।।

गये तुझपर उछाले लाख कीचड़ हो मगर यारा।
नहीं रख भाव बदले की नहीं कीचड़ उछाला कर।।

भयावह रात का सपना सताए जो कभी तुझको।
जलाकर ज्ञान का दीपक बुझे मन में उजाला कर।।

भरोसा मातु पर रखकर चलो तुम बेझिझक प्यारे।
मिले मंजिल बिना बाधा भजन कुछ भक्ति वाला कर।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क-9835232978

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