अनुप्रास अलंकारित।
मनहरण घनाक्षरी।
राम में रमाइए।
रामदूत राम-भक्त, रमणीय रंग-रक्त,
राही जो अपंगे गूंँगे,राम में रमाइए।
मारुति मंगलकारी, महावीर धर्माचारी,
मनोबल मन मेरा,मन में समाइए।
अमर अंजनी पुत्र, अतुलित बल-सूत्र,
आसरा है अब आप,अपना बनाइए।
विद्या-बुद्धि के निधान,बसे हैं हृदय-स्थान,
बजरंगी बलधाम,वासना मिटाइए।
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
सेवानिवृत शिक्षक,
मध्य विद्यालय दरवेभदौर

