शिव विवाह -रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

RAMPAL SINGH ANJAN

क्षितिज लालिमा की झलक,संपूरित उल्लास।

नभचर थलचर चेतना,भरतीं हैं हुल्लास।।

सारी सृष्टि सजी-धजी,निकलेगी बारात।

गाजे-बाजे में खिले,दानव-मानव जात।।

जय-जय हे शिव-पार्वती,मिटें दिलों की स्याह।

उन्मत उत्सव दिव्यता,दिखा रही शुभ राह।।

प्रेम-त्याग सम मेल से,होगी धरा सनाथ।

खींची धर्म लकीर की,हम सब होंगे साथ।।

तट द्वि खड़े हैं शिव-शिवा,मध्यम परमाधार।

सागर सुलभ ढलान पर, तत्वज्ञान विस्तार l l

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

अवकाश प्राप्त

मध्य विद्यालय दर्वेभदौर

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