“कुष्माण्डेति चतुर्थकम् ” रविसम दीप्त देह केर आभा, दुर्गा अष्ट भुजा बाली। इषित हाससँ सृजित केलहुँ ब्रह्मांड सकल पुनि प्रतिपाली।[...]
“कुष्माण्डेति चतुर्थकम् ” रविसम दीप्त देह केर आभा, दुर्गा अष्ट भुजा बाली। इषित हाससँ सृजित केलहुँ ब्रह्मांड सकल पुनि प्रतिपाली।[...]