Tag: गिरीन्द्र मोहन झा

Girindra Mohan Jha

सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:04 pm

सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

मृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झामृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 3:08 pm

मृत्यु अटल है, शरीर की, मरण असम्भव, जमीर की, मृत्यु यदि मिले सुमृत्यु तो, देश हित, लोक हित में हो,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

किसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकिसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:27 pm

किसने रोका है? अंधेरा घोर घना है, एक बत्ती जलाने से किसने रोका है? प्रदूषण बहुत ही है, एक पेड़[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

लक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झालक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 3:02 pm

लक्ष्य से अधिक है दिशा महत्त्वपूर्ण, सही दिशा में सतत करते रहो प्रयास, यदि दिशा सही हो, तो तू अगर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें