मृत भुवन में मैं था कब से भटक रहा, जीवन बदल गया जब पाया गुरु ज्ञान। रोज कुछ छाँटकर, प्यार[...]
Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”
गुरु भगवान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गुरु भगवान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मृत भुवन में मैं था कब से भटक रहा, जीवन बदल गया जब पाया गुरु ज्ञान। रोज कुछ छाँटकर, प्यार[...]
चन्द्र यान की सफलता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चन्द्र यान की सफलता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
विक्रम की लैंडिंग को देखा दिल थाम कर, कठिन जोखिम भरा मिशन था चंद्रयान। बरसों की तपस्या का आज जाके[...]
विजयी विश्व तिरंगा – जैनेन्द्र प्रसाद रविविजयी विश्व तिरंगा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
लगन और मेहनत के बल पर बंजर में फ़सल उगाएंगे। विजयी विश्व तिरंगा को हम आसमां में लहराएंगे।। 1971 के[...]
धान की बुआई – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’धान की बुआई – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मिलके लुगाई संग धान की बुवाई करें, फसल उगाने हेतु किसान लगाता जोर। हल उठा काँधे पर खेतों की जुताई[...]
बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
रूप घनाक्षरी छंद पानी हेतु किसानों की नजरें तरस रहीं, धूल उड़े सावन में देख रहे आसमान। नमी बिना खेतों[...]
बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बरखा बहार आई मन में उमंग छाई, मोती जैसे आसमान झमाझम बरसे। नई – नई दूब उगी, फसल की आस[...]
प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
छंद -रूप घनाक्षरी अचानक मौसम ने बदला है करवट, आज सारे जीव जंतु गर्मी से गए हैं हार। पसीने से[...]
फलों का राजा आम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’फलों का राजा आम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
आम का मौसम आया, स्वादिष्ट सौगात लाया, सुन्दर रसीले और भाव-सुर लहरी। कोई खाए आम्रपाली, केशर किशुन भोग, जर्दालु केसर[...]
वर्षा रानी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’वर्षा रानी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
वर्षा आई झमाझम, मोती गिरे छमाछम, किसानों के चेहरे पे खुशी की निशानी है। बिजली कड़क रही, घटाएं गरज रहीं,[...]
