Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

Jainendra

कट जाता बंधन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’कट जाता बंधन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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जलहरण घनाक्षरी छंद एक साथ चारों भाई पालने में झूल रहे, देख मनोहारी छवि, पाया दुनिया का धन। ऐसे रघुवर[...]

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सबसे बड़ा धर्म – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सबसे बड़ा धर्म – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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जातियों के नाम पर, इंसानों को बाँटा जाता, अक्सर दो जातियों में, होता तकरार है। कई लोग बैठे हुए हैं[...]

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Jainendra

शरणागत की रक्षा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’शरणागत की रक्षा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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प्रभाती पुष्प जलहरण घनाक्षरी छंद बक्सर में ऋषियों के यज्ञ को सफल किया, अनुज लखन संग, ताड़का को मार कर।[...]

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दशरथ के नंदन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दशरथ के नंदन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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जलहरण घनाक्षरी छंद जगत कल्याण खातिर साक्षात् त्रिभुवन पति, कौशल्या के गोद आए, रामजी बालक बन। देवों के गुहार पर[...]

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मनहरण घनाक्षरी छंद में – जैनेन्द्र प्रसाद रविमनहरण घनाक्षरी छंद में – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

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प्रभाती पुष्प मनहरण घनाक्षरी छंद में पति व पत्नी के बीच नहीं करें कोई जिच, हमेशा बना कर रखें, आपस[...]

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गिरगिट भी शर्माए – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गिरगिट भी शर्माए – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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सुबह में किस दल रात में जाएं बदल, नेताओं के रंग देख, गिरगिट भी शर्माए। चुनाव के समय में नए-नए[...]

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Jainendra

दिल्ली पर नज़र – जैनेन्द्र प्रसाद रविदिल्ली पर नज़र – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

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चुनाव से हर बार तय होती जीत हार, किसी की आसान नहीं, सत्ता की डगर है। बयानों का ले के[...]

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Jainendra Prasad Ravi

जलहरण घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद “रवि’जलहरण घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद “रवि’

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प्रभाती पुष्प जलहरण घनाक्षरी छंद हमेशा मगन रहें ईष्ट का भजन करें, वृथा नहीं नष्ट करें, समय को पल भर।[...]

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Jainendra Prasad Ravi

प्रेम उपहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रेम उपहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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प्रेम उपहार बाल भावना को स्पर्श करती रचना (मनहरण घनाक्षरी छंद में) नाजुक- कोमल कली, बागानों में जैसे माली, करे[...]

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Jainendra

मौसम का कहर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का कहर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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गर्म ये हवाएं चली,वदन में आग लगी, अप्रैल के आरंभ में, खिल रही कड़ी धूप। अभी केवल झांकी है, मई[...]

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