Tag: देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 8:18 pm

राम नाम रटते रहो, लेकर मन विश्वास। प्रभु तो दीनदयाल हैं, रखो दया की आस।। राम नाम सुखधाम है, राम[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:12 pm

उत्तरायणी पर्व का, हुआ सुखद आगाज। ढोल नगाड़े बज रहे, होंगे मंगल काज।। सूरज नित अभिराम है, जीवन का आधार।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

मुक्तक – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मुक्तक – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 2:20 pm

हमारे देश की हिंदी, सुशोभित सौम्य-सी लगती। यही है भाल की बिंदी, बड़े ही गर्व से सजती।। मधुर रस भाव[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 7:04 pm

पावन शुचिमय भाव रख, रचें नवल संसार। दे सबको नव वर्ष शुभ, खुशियों का उपहार।। द्वेष पुराना भूलकर, करिए नेक[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 4:46 pm

शीत मास में हम सभी, रखें गात का ध्यान। स्वस्थ देह सद्कर्म ही, सुखद शांति संज्ञान।। दस्तक दी है शीत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 3:00 pm

पावन कार्तिक मास में, करें छठी का ध्यान। गुणवंती करुणामयी, महिमा बड़ी महान।। जग की आत्मा सूर्य को, करें नित्य[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 12:03 pm

दीप जलें जब द्वार पर, मिलता नवल प्रकाश। खुशियाँ अंतस् तब मिलीं, हुआ तिमिर का नाश।। दीप अवलि में सज[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 8:58 pm

चंद्रयान है चाँद पर, हर्षित भारत देश। वैज्ञानिक सब धन्य हैं, देख सुखद परिवेश।। जय जय भारत देश में, जय[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

बेटी – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’बेटी – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 8:54 pm

ममता बड़ी प्यारी है, समता बड़ी न्यारी है, बेटी ही तो बनती माँ, माँ की परछाईं है। मानवता की जान[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 8:51 pm

बेटी से नित बढ़ रहा, आज देश का मान। बेटों से आगे सदा, रहते इनके काम।। रहते इनके काम, देश[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें