भीषण गर्मी का एक दिन था सूरज चमक रहा था सिर पर। गर्म हवा के झोंकों को, झाँक रही धरती फट-फट कर।। तभी पेड़ों की एक शाखा पर कौवा…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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