मातृ-भक्ति का मुझे मिला, जो प्रसाद नौनिहाल का, नूतन दिवस है मेरी प्रतिकृति के दसवें साल का। नन्हीं कली का मधु-स्पंदन, मेरी कोख में आया था, उस क्षण की अनुभूति…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- परीक्षा केअ एलै बहार-नीतू रानी
- हरि वामन बन आए-राम किशोर पाठक
- मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक
- चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक
- परीक्षा-नैना कुमारी
- वामन अवतार- राम किशोर पाठक
- अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
- कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
- अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
- गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा