ये कैसे दोस्त हैं मेरे मुझे बूढ़ा होने नहीं देते सभी दूर हैं मुझसे कोई नहीं है आस-पास। पर सभी जुड़े हैं एक दूसरे से मोतियों की माला की तरह…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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