जो बीत रहा है समय अभी, वह लौटकर कभी न आएगा। सदियों वर्ष यों ही बीत गए, अब २०२४ भी बीत जाएगा। समय नहीं कभी बैठा रहता, यों ही…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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