टीचर्स ऑफ बिहार : नवचेतना का उद्घोष-मनु कुमारी

जब शिक्षा को मिला नव संबल,

जब शिक्षक को पहचान मिली,

बीस जनवरी का वह पावन दिन,

नव इतिहास की आधारशिला मिली।

विचार बने दीप, श्रम बनी लौ,

प्रतिभा को मिला विस्तार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

जो स्वयं से थे अबूझ, अनदेखे,

उनको आई अपनी पहचान,

शब्दों ने स्वर पाया, भावों ने,

छू लिया साहित्य का आकाश।

कवि, लेखक, सर्जक बनकर,

निखरा सृजन संसार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

स्वर, ताल और रंगों में,

नव सृजन का बहता धार,

कला, संस्कृति, चेतना बनकर,

उभरा शिक्षक का अवतार।

सीख बनी उत्सव, श्रम बना साधना,

रचनात्मकता का विस्तार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

विकट पलों में धैर्य बना,

संकल्प बना आधार,

साथ खड़े होकर सत्य पथ पर,

लड़ा गया हर संघर्ष अपार।

अपराजिता के सम्मुख झुकना,

केवल मूल्यों का स्वीकार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

शिक्षा हो या सामाजिक पीड़ा,

समाधान का पथ दिखाया,

गद्य में चेतना, पद्य में संवेदना,

हर शब्द को अर्थ मिला पाया।

विचारों से भरे आलेखों ने,

रचा बौद्धिक संस्कार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

यहाँ हर शिक्षक साधक है,

हर दिन कर्म का उत्सव है,

नवाचार, नीति और मूल्य संग,

कक्षा-कक्षा में नव युग है।

शिक्षक से समाज तक,

फैला परिवर्तन का संचार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

सौभाग्य हमारा, यह मंच मिला,

जहाँ सपनों को पंख लगे,

संभावनाओं को दिशा मिली,

असंख्य उपलब्धियों के रंग जगे।

एक नहीं, अनगिनत सपनों ने,

यहाँ पाया साकार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

जिन्होंने प्रश्नों के शूल दिए,

आज उत्तर बन इतिहास खड़ा,

प्रतिभा का परचम हर दिशा में,

शिक्षक का गौरव ऊँचा चढ़ा।

देश पथ पर अग्रसर होगा,

सबसे आगे बिहार—

गूँजा नाद— टीचर्स ऑफ बिहार।

स्वरचित एवं मौलिक

मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल

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