विकास पुरुष-मनु कुमारी

Manu

बिहारक जनता अखन रोई रहल छनि

नयन सँ झहरैत अछि बस नीर,

इस्तीफा द कऽ अहां जाइ रहल छी,

हे विकास पुरुष ! बड़ देलहुं पीर।

जखन अन्हार घेरने छल बिहार कय,

निराशा देने छल चहुँदिस पांव पसार,

ओहि घड़ी आशा कऽ दीप बनि क’

कयलहुं सगठे उजियार।

गामक पथ पर उजियार भेल,

सड़क बनल, पुल बनल अपार,

विद्यालयक आँगन में खिलल,

शिक्षा केर सुमन हजार।

बेटी सभक सम्मान बचेलौं

महिला सुरक्षा कें द’ आधार,

डरक बदला विश्वास जगल,

हर घर-आँगन, हर परिवार।

शराबबंदी क’ संकल्प ल’,

समाज सुधारक दीप जरौलौं ।

 मिटा कऽ सभक घरक अन्हार,

नव जीवनक राह देखेलौं ।

बालिका शिक्षा पर बल देलौं,

आ साइकिल सौं देलहुं पंख उड़ान।

विद्यालय दिसि हँसैत-खेलैत,

चलि पड़ल हजारों अरमान।

प्रोत्साहनक राशि देलहुं अहां,

किशोरी के सपना भेल साकार।

नव पीढ़ी अपन भविष्यक लेल,

खुद लिखै छनि भाग्य, गढै छथि संकार।

प्रशासन में अनुशासन आनलौं,

न्याय संग बहेलौं विकासक धार।

नौकरीक अवसर खुलल,

आशा सँ भरल अप्पन बिहार।

आज विदाईक बेला आयल,

मन में उठैत हूक हजार,

पद त’ छूटत, नाम अमर रहत,

जन-जनक हृदय अपार।

हे युग पुरुष! अहाँक तपस्या,

माटिक कण-कण में बसत।

जतय-जतय बिहारक नाम होयत,

अहाँक गाथा संग-संग चलत।

आइ विदाईक ई क्षण आयल,

सभक आँखि में नोर भरल।

जाहि पथ पर अहाँ चललहुँ

ओ पथ सदिखन रहय फूल सँ सजल।

जखन साँझ पड़त बिहार पर,

आशाक दीप जरत हर द्वार।

लोक चुपचाप मनहि मन कहत,

“अहाँक काज सँ उज्ज्वल बिहार।”

यदि कहियो इतिहास पुछत,

के बदलल छल ई तकदीर।

माटि, गाछ, नदी सभ कहत—

“ओ छल नीतिश कुमार ‘जननायक’ धीर।”

आइ गामक बूढ़-पुरान कहैतनोर सँ भीजल ई बात,

“अहाँ जइसन सेवक केर फेर

जनमय में लागत बरसों-बरस, रात।”

नयन भीजल, कंठ रुँधायल,

जनमन करैत करजोरी पुकार,

“युग पुरुष! अहाँ जाइयो जँ दूर,

मुदा अहाँ बिना सूना लागत बिहार…

जय नीतिश कुमार, जय बिहार।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल

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