मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ, खामोशी में कुछ कहती हूँ। आँखों में सपनों की दुनियाँ, दिल में[...]
ज़िंदगी की आस बाकी है – पूनम कुमारीज़िंदगी की आस बाकी है – पूनम कुमारी
ज़िंदगी की आस बाकी है टूटे सपनों की किरचों में, अब भी कोई उजास बाकी है, थकी हुई इन साँसों[...]
मुझे मेरा बचपन लौटा दे – खुशबू कुमारीमुझे मेरा बचपन लौटा दे – खुशबू कुमारी
मुझे मेरा बचपन लौटा दे ए गुजरा हुआ समय, मुझे मेरा बचपन लौटा दे। थक चुकी हूं जीवन से, मुझे[...]
मेरी माँ – खुशबू कुमारीमेरी माँ – खुशबू कुमारी
शायद अब माँ बूढ़ी हो रही है, पर मन इस बात को मानने से इन्कार कर रहा है। कभी- कभी[...]
मीना की बच्चियां – नीतू रानीमीना की बच्चियां – नीतू रानी
मीना की बच्चियांँ। मीना की बच्ची ने कर दी कमाल ड्रेस में आती स्कूल रीबन से बाँध के बाल समय[...]
लालच की अंतहीन गर्त -धर्मेंद्र कुमार ठाकुरलालच की अंतहीन गर्त -धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
लालच की अंतहीन गर्त यह सूक्ष्म सुई के छेद जैसी, दिखती छोटी इक थैली है, पर इसके भीतर छिपी हुई,[...]
श्वेत सोना. धर्मेंद्र कुमार ठाकुरश्वेत सोना. धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
धरती का अनमोल रत्न हूँ, नभ का गोरा चाँद हूँ, मैं कपास का रूप नहीं, इस सृष्टि का वरदान हूँ।[...]
क्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
क्रोध की सीमा न होती है, जब यह उमड़ आती है, इसकी ज्वाला धधक-धधक कर, विवेक मानव खा जाती है।[...]
हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
प्रकृति के पेड़-पौधे हम बेचारे, हम मानव के बहुत काम आए, आएँगे। पर मुझे यह अरमान नहीं कि मानव से[...]
उड़ान-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरउड़ान-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
पंख नहीं हैं मेरे अपने, पर देखा है ढेरों सपने। शून्य खड़ा हूँ भूमि पर मैं, पर छूना है नील[...]
