Punam Kumari

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ — पुनम कुमारीमद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ — पुनम कुमारी

0 Comments 4:57 pm

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ, खामोशी में कुछ कहती हूँ। आँखों में सपनों की दुनियाँ, दिल में[...]

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Punam Kumari

ज़िंदगी की आस बाकी है – पूनम कुमारीज़िंदगी की आस बाकी है – पूनम कुमारी

0 Comments 4:53 pm

ज़िंदगी की आस बाकी है टूटे सपनों की किरचों में, अब भी कोई उजास बाकी है, थकी हुई इन साँसों[...]

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Khushboo Kumari

मुझे मेरा बचपन लौटा दे – खुशबू कुमारीमुझे मेरा बचपन लौटा दे – खुशबू कुमारी

0 Comments 4:13 pm

मुझे मेरा बचपन लौटा दे ए गुजरा हुआ समय, मुझे मेरा बचपन लौटा दे। थक चुकी हूं जीवन से, मुझे[...]

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Nitu Rani

मीना की बच्चियां – नीतू रानीमीना की बच्चियां – नीतू रानी

0 Comments 1:01 pm

मीना की बच्चियांँ। मीना की बच्ची ने कर दी कमाल ड्रेस में आती स्कूल रीबन से बाँध के बाल समय[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

लालच की अंतहीन गर्त -धर्मेंद्र कुमार ठाकुरलालच की अंतहीन गर्त -धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:30 am

लालच की अंतहीन गर्त यह सूक्ष्म सुई के छेद जैसी, दिखती छोटी इक थैली है, पर इसके भीतर छिपी हुई,[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

श्वेत सोना. धर्मेंद्र कुमार ठाकुरश्वेत सोना. धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:32 am

धरती का अनमोल रत्न हूँ, नभ का गोरा चाँद हूँ, मैं कपास का रूप नहीं, इस सृष्टि का वरदान हूँ।[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

क्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:26 pm

क्रोध की सीमा न होती है, जब यह उमड़ आती है, इसकी ज्वाला धधक-धधक कर, विवेक मानव खा जाती है।[...]

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Umesh kumar sinha

हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘

0 Comments 11:15 pm

 प्रकृति के पेड़-पौधे हम बेचारे, हम मानव के बहुत काम आए, आएँगे। पर मुझे यह अरमान नहीं कि मानव से[...]

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