राज दिल का खोलिए।
फाग में कुछ बोलिए।।
लाल सबके गाल हैं।
रंग शोभित भाल हैं।।
शोखियाँ है नैन में।
जागते सब रैन में।।
रूप सबने नव गढ़ा।
भंग जैसा है चढ़ा।।
जोश को मत तोलिए।
फाग में कुछ बोलिए।।
आज गलियाँ गाँव की।
धूल छलिया पाँव की।।
मोह में सब पड़ गये।
नैन अंजन जड़ गये।।
गोरियाँ राधा बनी।
प्रेम तब बाधा बनी।।
प्रीत का रस घोलिए।
फाग में कुछ बोलिए।।
रंग हाथों में रहा।
शाम भी ढलकर कहा।।
देखती निज अंग में।
डूबकर हर रंग में।।
मौन श्यामा आज है।
गौन सारा काज है।।
श्याम के सब हो लिए।
फाग में कुछ बोलिए।।
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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