माना नहीं मशहूर वह सबकी आंखों का नूर वह। नित नया रचता रहे कुछ हम सबका है गुरुर वह।। काम[...]
Day: May 1, 2023
श्रमिक की व्यथा-कथा- सुरेश कुमार गौरवश्रमिक की व्यथा-कथा- सुरेश कुमार गौरव
मैं भी शान से जीना चाहता हूं मेहनत की रोटी कमाता हूं, दृढ़ शौक है मेरे भी कुछ, बच्चों को[...]
मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
(रूप घनाक्षरी छंद) ठंडी-ठंडी हवा चली, सूखी मिट्टी हुई गीली, धूल भरी आंधी लाया, बादल ने बूंदों संग। हाँफ रहे[...]
बाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनीबाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनी
अपने बचपन को खोता कितना वह लाचार। मलिन सी काया,दुर्बल छवि,जीर्ण- शीर्ण आकार। अत्यंत आवश्यक प्यासे को पानी भूखे को[...]
