आत्मविश्वास से भरे डगर में ,
न मन, प्राण , वचन से पीछे जाना ।
हम सबके दिल के स्नेह हो प्यारे ,
भविष्य में अपनी पहचान बनाना ।
मन हर्षित दिल अभिलषित है मेरा ,
तू अभी से सँभलते जाओ ।
स्नेहसिक्त करूँ आज तुझे मैं ,
अपने पथ के काँटे चुनते जाओ ।
तुमसे स्नेह बहुत है मुझको ,
यही शिक्षक का दायित्व बड़ा है ।
सामने जो लक्ष्य दिखाई देता ,
तेरा सच में वही अरमान खड़ा है ।
कभी मन नहीं दस बीस हो तेरा ,
सदा एक लक्ष्य से बढ़ते जाओ ।
आगे चलकर तुम्हीं देश के
स्वर्णिम भविष्य भी गढ़ते जाओ ।
अपने को कभी कम न आँकों ,
पर सपने में न कभी अभिमान करो ।
अपने जीवन को सदा ऐसे मोड़ो ,
हरदम दया धर्म की शान भरो ।
गर्व हो सारे देश का तुझपर ,
ऐसा अमित पराक्रम दिखलाना ।
स्वर्णिम सुयश सुमधुर पथ हो तेरा ,
ऐसा नवल धवल इतिहास बनाना ।
अमरनाथ त्रिवेदी
पूर्व प्रधानाध्यापक
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैगरा
प्रखंड बंदरा , जिला मुजफ्फरपुर
