प्यारा गाँव- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

सबसे प्यारा गाँव हमारा, अद्भुत सुंदर न्यारा है। चलो तुम्हें हम आज दिखाएँ, उर का भाव हमारा है।। होती अनुपम मृदा गाँव की, सत्य सभी ने जाना है। खान गुणों…

शरद्ऋतु- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

सूरज दादा शांत पड़े हैं जाड़े ऋतु से डरकर, सीना तान खड़ा हुआ शरद्ऋतु जब तनकर। चाय-कॉफी सबका मन भाए, अंडा मांस मछली, एसी,कूलर,फ्रीज की हालत अब हुई है पतली।…

राष्ट्र नेता- अश्मजा प्रियदर्शिनी

रक्त से लिखी गई गाथा जिनकी, बल-बलिदान अहिंसा बने आदर्श। राष्ट्र के प्रति सहज विश्वास के प्रतीक उस श्रद्धा समर्पित राष्ट्रनेता को, वन्दन है बारंबार। जिनके पाथेय, आदर्श सुना पढाए…