अकड़म बकड़म छंद — पद्धरि मात्रा — १६ अंत – जगण बच्चे सब पूछें यह सवाल । सूरज क्यो होता लाल-लाल ।। क्यों नीला लगता आसमान । भौंहों को कहते…
Author: Anupama Priyadarshini
घनाक्षरी”मेरी कामना” – एस.के.पूनम
जाग कर प्रातःकाल,निकलूँ अकेले राह, मेरे दोनों चक्षुओं में,भरे कई रंग हैं। मृदुल झंकार सुन,नव अनुराग चुन, मन पुलकित होता, जीने का ये ढ़ंग है। उस पथ को मैं चला,जहाँ…
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बादल से जल मिले, भोजन से बल मिले, कभी कहीं तेल बिना, दीप नहीं जलता। काल पा के बड़ा होता, समय से खड़ा होता, बसंत के आने पर, वृक्ष भी…
जीवन का मर्म – कुमकुम कुमारी”काव्याकृति”
भूलकर भेदभाव,दिल में हो समभाव, जीभ पर रहे सुधा,प्रेम रस पीजिए। होठों पर मुस्कान हो,गम का न निशान हो, मीठे बोल बोलकर, सुख सदा दीजिए। जीवन में हो उमंग,चाह का…
पुस्तक मेला – नीतू रानी
रेणु उद्यान में पुस्तक मेला लगा है चलो हम सब करें पुस्तक दान, हर पंचायत में हो एक पुस्तकालय पढ़ेंगे वहाँ बच्चे बूढ़े जवान। राहुल कुमार डीएम साहब के द्वारा…
पुस्तक सच्ची मित्र हमारी -मीरा सिंह “मीरा”
भला बुरा सबको समझाती हल्का करती हर दुख भारी। हाथ पकड़कर राह दिखाती पुस्तक सच्ची मित्र हमारी।। हर बाधा से हमें बचाती यह जीने का हुनर सिखाती। जब गहराता गहन…
किताब -मो.मंजूर आलम
खाली अलमारियों को किताबों से भर दो, बैठो कभी तन्हा तो निकाल कर पढ़ लो। हो मन उदास तो- उठा लो कोई गीत गजल चुटकुले कहानियों की किताब… पढ़ भगा…
बाल घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बच्चे करें भागदौड़, जैसे होता घोड़ा दौड़, कोई कीत-कीत कोई, खेलता कबड्डी है। किसी की कमीज ढ़ीली, नया जूता पैंट नीली, कोई पेन्हें कोट-शर्ट, कोई पेन्हें चड्डी है। बिना चक्का…
प्रारंभ -अदिती भुषण
वो शाम सुहानी जाते जाते, कर गई रूहानी जाते जाते। संदूक में दबा कर रखा था, जिन जज़बातों को हमने कभी, न जाने कैसे खुल गई जाते जाते। कितना कुछ…
श्रुति सम भिन्नार्थक शब्द -सुधीर कुमार
अंश मतलब हिस्सा होता, अंस का मतलब कंधा शूर मतलब वीर है होता, सूर का मतलब अंधा मीत का माने सबसे प्यारा, मित्र का अर्थ है साथी हस्त का अर्थ…