प्रकृति की कल्पना कोमल, मधुर रस धार है नारी। नहीं नर से कहीं कम ,सृष्टि का श्रृंगार है नारी ।। ये नारी स्नेह की प्रतिमा …
Author: madhukumari
नारी- राम किशोर पाठक
नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती। जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।। देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती। हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।। ममता…
श्याम नारी वेश में-राम किशोर पाठक
श्याम नारी वेश में। पुष्प डाले केश में।। माथ पर डलिया लिए। कान की बलिया लिए।। हार कंगण संग में। चूड़ियाँ नवरंग में।। नारियों के देश में । श्याम नारी…
कलह-मनु कुमारी
प्रेम से बनता स्वर्ग सा घर है,कलह से बिखरता संसार। कलह से अगर बचना है तो, नि:स्वार्थ प्रेम कर रिश्तों से यार।। ईर्ष्या, द्वेष का जब धुंआ उठे, तब दिलों…
देवी अवतारी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
संसार की माता बन संतानों को पालती हैं, सृष्टि की कीमती रत्न, दुनिया में नारी है। घर हो या राजनीति तालमेल बैठाती है, जीवन सफ़र पर, कभी नहीं हारी है।…
करूणा की धारा – मनु कुमारी
ममता की मूरत है वो, करूणा की निर्मल धारा है। मां ,बहन ,पत्नी ,सखी रूप में,रिश्तों की बगिया को संवारा है। रात- रात भर जागके जिसने,निज संतति को पाला है।…
बस इतना देना-मधु कुमारी
सृष्टि के निर्माण में जो साझेदारी कर सकती है अपना छोड़ जो सबकी हितकारी बन सकती है जो हंसकर अपमान भरे विष प्याला भी पी सकती है हर चुनौती का…
वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप-राम किशोर पाठक
वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप। उसके सारे रूप निराले, लगते बड़े अनूप।। धीरज धरती सा रखती हैं, पर्वत सा विश्वास। नदियों जैसी बहती हर-पल, लेकर सदा मिठास।।…
नारी एक”कल्पना”- बिंदु अग्रवाल
हाँ !मैं कल्पना हूँ उस परमपिता परमेश्वर की, जिसने मुझे यह स्वरूप दिया, साथ ही दिया एक कोमल हृदय। सहनशक्ति दी धरती सी, और पवन सा वेग दिया। एक मूक…
बेटियाँ-आशीष अम्बर
बेटियाँ दोनों कुल की मर्यादा है, उनसे ही होता कुल का वैभव । उसी के वश में सृजन सृष्टि है, रहती हरदम सबके लिए सुलभ । खेलकूद में भी बेटियों…