कैसे समझोगे तुम कैसे समझोगे तुम समय को, जिसने लोगों को जीना सिखाया। कैसे समझोगे तुम स्वजन को, जिसने तुम्हारा मान बढ़ाया। कैसे समझोगे तुम परिजन को, जिसने तुम्हारा अपमान…
Author: madhukumari
ठंडा – नीतू रानी
ठंडा का महीना थर- थर कांँपै सब लोग, कोना केअ बनाएब खाना कि खायत बच्चा मोर। मन नै करैयेअ हम बिछना सेअ निकली ठंडा पैन सेअ हम बर्तन धोबी, ठंडा…
आँसू और खामोशी – नीतू रानी
आँसू और खामोशी सिर्फ महिलाओं में हीं होती, ये दोनों लेकर महिला दिन- रात हैं रोती। आँसू और खामोशी महिलाओं को सोने नहीं देती, ये दोनों को सिर पर लेकर…
धन्यवाद टीचर्स ऑफ बिहार – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”
है कोटि-कोटि धन्यवाद ऐ टीचर्स ऑफ बिहार तेरे बदौलत हीं सबका होता है सपना साकार रचनाएं दब सी जाती थी होता न था प्रचार प्रसार लिखना शुरू मैंने किया तुने…
आओ नववर्ष मनायें – मनु रमन
आओ नववर्ष मनायें। खुशियों के फूल खिलाएं। नयी उम्मीदें नयी उमंगों के साथ , नित्य नया कुछ कर जायें। नये सपनों को देखें, उसे सही आकार दें। नीले- नीले आसमान…
अलाव-राम किशोर पाठक प्रधान शिक्षक
कुहासा है घना देखो, जलाने आग अब आओ। रहे हो कांँपते अबतक, जरा अब तापकर जाओ।। पता पथ का नहीं चलता, उजाला मिल न पाता है। चलें अब राह हम…
सावित्री बाई फुले-राम किशोर पाठक
तर्क कसौटी की थी दात्री। सावित्री शिक्षा की जात्री।। ज्योति जलाने जग में आई। नारी शिक्षा को फैलाई।। बनकर वह एक अधिष्ठात्री। सावित्री शिक्षा की जात्री।।०१।। पति से मिलकर कदम…
रघुवर नमन- राम किशोर पाठक
करता रघुवर नमन तुम्हारा। चंचल चितवन चमन हमारा।। कैसे सुलभ सहज सब पाऊँ। कैसे निषाद चरण पखारा।। करता रजकण शिला अहिल्या। दे दो प्रभु अब हमें किनारा।। पाया अतिशय दुख…
दिल्ली में -नीतू रानी
मैं आई हूँ दिल्ली नगर , यहाँ चल रहा शीतलहर। हवा बहुत है चल रही, ठंड बहुत है बढ़ रही। नल से गिरता ठंडा पानी, छूते याद आती है नानी।…
चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
शुभ भोर देख कर खग जागे। डाली तरुवर पर से भागे।। विश्वास ध्यान अब है भू पर। खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।। जब भूख विवश करता तन को। करते सहमत अपने…